बुधवार, 22 अप्रैल 2015

मौत का मंजर

मौत का मंजर



कल शाम टी बी पर एक घटना देखी 
लाचार मजबूर किसान 
इस उम्मीद के साथ
तप्ति  धूप में
बृक्ष पर खड़ा होकर 
नेताओं के शब्दों को ध्यान से सुनता हुआ 
कि शायद अब उसके हालात बदल जाएँ
अचानक क्या हुआ 
कि उसे शब्द खोकले लगने लगे 
आशायें  चकनाचूर होते दिखने लगी 
नेताओं का असली स्वरुप नजर आने  लगा
और इस मिथ्या संसार को 
उसने अलबिदा करने का मन बना लिया 
सिस्टम ने एक किसान की जान ही नहीं ली 
अपितु 
इस घटना ने 
नेताओं की सम्बेदन हीनता को ही  उजागर नहीं किया 
बल्कि पुलिस का गैर जिम्मेदाराना ब्यबहार भी दिखा दिया 
तमाशबीन दर्शकों का असली चेहरा भी सामने ला दिया
धरती पुत्र किसान को भी ये अहसास भी  करा दिया 
कोई किसी की लड़ाई नहीं लड़ता है 
अपने बजूद को बचाने के लिए 
हर एक को खुद आगे आना होगा 
ना की मजबूर  होकर
आत्मघाती कदम उठाना। 


2 टिप्‍पणियां:

  1. yahi to is desh ka durbhagya hai ek ek kisan suicide kar leta hai aur neta log bhashn dete rah jate hain...isliye to hamara desh tarakki nahi kar paa raha hai..
    sundar abhiwakti jahir kiya hai aapne ..mere blog par aane ke liye aapka shukriya ...do visit again.
    iwillrocknow.blogspot.in

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  2. दुःख की इस घडी में सबक खुद ही आना होना..भगवान सबको इतना सामर्थ दे की इस दुःख से उबार सके..

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