बुधवार, 18 नवंबर 2015

रिश्तें नातें प्यार बफ़ा

 
 
 
रिश्तें नातें प्यार बफ़ा से
सबको अब इन्कार हुआ

बंगला ,गाड़ी ,बैंक तिजोरी
इनसे सबको प्यार हुआ

जिनकी ज़िम्मेदारी घर की
वह सात समुन्द्र पार हुआ

इक घर में दस दस घर देखें
अज़ब गज़ब सँसार हुआ

मिलने की है आशा जिससे
उस से सब को प्यार हुआ

ब्यस्त हुए तव बेटे बेटी
बूढ़ा जब वीमार हुआ


रिश्तें नातें प्यार बफ़ा
 
 
मदन मोहन सक्सेना

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (20.11.2015) को "आतंकवाद मानव सम्यता के लिए कलंक"(चर्चा अंक-2166) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

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  2. आज की भौतिकता प्रधान दुनिया में इसे ही व्यावहारिकता कहा जाता है.

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